जौहर और सती पर बढा विवाद, अब खाचरियावास ने दी मंत्री को नसीहत

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जयपुर,17 मई (उदयपुर किरण). कक्षा आठ की अंग्रेजी की किताब के कवर पेज पर लगी जौहर की फोटो हटाने और महाराणा प्रताप को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकडता जा रहा है. इस मामले में शुक्रवार को केबिनेट मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास और पूर्व सांसद गोपाल सिंह ईडवा भी कूद गए हैं. दोनों ने शिक्षा मंत्री को नसीहत दी कि इस तरह के मामलों में सभी लोगों को जल्दबाजी से बयान देने से बचना चाहिए.  कांग्रेस के इन दोनों नेताओं ने उप मुयमंत्री सचिन पायलट से बात भी की है और यह मामला अब मुख्‍यमंत्री के पास भी पहुंच गया है. इधर, पायलट ने कहा है कि पाठ्यक्रम बदला नहीं है और सुझाव मांगे जा रहे हैं. पाठ्यक्रम का निर्णय कमेटी करेगी. 

इस मामले में खाचरियावास ने कहा कि जौहर भारतीय इतिहास का अभिन्न हिस्सा है जिसे कोई मिटा नहीं सकता. जौहर और सती प्रथा को अलग-अलग नजरिये से देखा जाना चाहिए. एक बयान जारी कर खाचरियावास ने कहा कि इतिहास की जानकारी को कोई भी व्यक्ति नजरअंदाज नहीं कर सकता. वह लोगों की भावनाओं से जुडा हुआ प्रसंग है, इस तरह के मामलों में सभी लोगों को जल्दबाजी से बयान देने से बचना चाहिये. पन्ने बदल देने से इतिहास नहीं बदला करते हैं. महाराणा प्रताप सामाजिक न्याय और धार्मिक एकता के प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं, उनकी सेना का सेनापति हकीम खां सूर मुसलमान था, कुंजा भीम आदिवासी था, भामाशाह वैश्य और झाला मन्ना राजपूत थे. आज भी महाराणा प्रताप को सामाजिक एकता, धार्मिक एकता, स्वाभिमानी, देषभक्त, कभी ना झुकने वाले योद्धा के रूप में पूजा जाता है.

इस मामले में दखल देते हुए पूर्व सांसद और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल सिंह ईडवा ने भी शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से असहमति जताई है. ईडवा ने कहा है कि वे मंत्री से बिल्कुल सहमत नहीं हैं. जौहर के संदर्भ में छेड़छाड़ करना ना तो ऐतिहासिक दृष्टि से ठीक है ना ही सामाजिक दृष्टि से. इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट से बात की है और मुख्‍यमंत्री को भी शिकायत देंगे. उन्होंने कहा कि जिस जौहर के कार्यक्रम में देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक आए हो उसका पता नहीं करना चाहिए था, मंत्री को यह बात पता कर लेनी चाहिए और अगर पता नहीं है तो हम उनको बता रहे है कि सती और जौहर में फर्क है. 

बता दें कि राज्य सरकार ने कवर पेज से जौहर का फोटो हटा दिया है और उसके स्थान पर चित्तौड किले का फोटो लगा दिया है. इसको लेकर शिक्षा मंत्री ने बयान दिया था कि ये सती प्रथा है और सती प्रथा पर प्रतिबंध है, इसे छात्रों को नहीं पढ़ाया जा सकता है. शिक्षा मंत्री के बयान के बाद मामला राजनीतिक तूल पकडता जा रहा है. पूर्व में इसके विरोध में पूर्व विधायक दीयाकुमारी और पूर्व शिक्षा मंत्री भी आमने सामने हो चुके हैं. 

पाठ्यक्रम में बदलाव तो होगा बडा आन्दोलन: राजवी

इस मामले में दखल देते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के दोहिते और भाजपा नेता अभिमन्यू सिंह राजवी ने सरकार को चेतावनी दी है कि पाठ्यक्रम में बदलाव हुआ तो प्रदेश भर में बडा आन्दोलन किया जाएगा. अपने निवास पर प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने सरकार को एक माह का समय देते हुए कहा कि आन्दोलन कि जिम्‍मेदार भी सरकार ही होगी. राजवी ने पाठ्यक्रम में बदलाव की खबरों के आधार पर मख्‍यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र भी लिखा है. महाराणा प्रताप को महान नहं कहना, मेवाड में मुगलों के हाथों महाराणा प्रताप को पराजित पढाना, पाठ्यक्रम से महारानी पद्मिनी और जौहर को हटाना एवं स्वतन्त्रता सेनानी वीर सावरकर का चरित्रहनन करके सरकार ने प्रदेश ही नही अपितु देश के इतिहास पर दाग लगाने का काम किया है. शिक्षा मंत्री के बयान पर कटाक्ष करते हुएराजवी ने कहा कि मंत्री को अभी स्वयं शिक्षित होने का आवश्यकता है. सावरकर के इतिहास को जानने के लिए मंत्री गाविन्द सिंह डोटासरा को अंडमान निकोबार में जाकर वहां जेल में दो दिन गुजारने चाहिए.

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