बजरी वाहनों से वसूली के आरोप में कांस्टेबल गिरफ्तार, वसूली की गई 1 लाख 46 हजार 500 रुपये की राशि बरामद

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बजरी वाहनों से वसूली के आरोप में कांस्टेबल सहित दो गिरफ्तार, वसूली की गई 1 लाख 46  हजार 500 रुपये की राशि बरामद

टोंक, 17 मई (उदयपुर किरण). टोंक जिले के पीपलू थाना क्षेत्र के नानेर गांव के चौराहे पर भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने गुरुवार रात को बड़ी कार्रवाई करते हुए बजरी से भरे वाहनों को निकालने की एवज में रिश्वत लेते हुए कांस्टेबल कैलाश जाट और दो दलालों रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. इस मामले में पीपलू थाना इन्चार्ज विजेंद्रसिंह गिल भी लिप्त थे. मामले की भनक लगने पर थानाप्रभारी थाने से फरार हो गए. जिन्हें एसीबी टीम तलाश रहीं हैं. एसीबी कार्रवाई एसीबी टोंक एडिशनल एसपी विजय सिंह के नेतृत्व की गई. इस कार्रवाई में जयपुर एडिशनल एसपी देशराज यादव का भी सहयोग रहा.
ज्वाईनिंग के साथ ही मिलने लगी थी शिकायतें-
एसीबी एडिशनल एसपी विजय सिंह ने बताया की पीपलू थाना प्रभारी विजेंदर गिल की लगातार शिकायतें मिल रही थी कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद बनास नदी से बजरी परिवहन का गोरख धंधा पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है. इस कार्य को पुलिस का कांस्टेबल कैलाश जाट जो कि एसएचओ का विश्वासपात्र था, वह संचालित कर रहा था. शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी टीम गुरुवार रात 11 बजे नानेर गांव के चौराहे पर दबिश दी. मौके पर कांस्टेबल कैलाश जाट बजरी वाहनों से अवैध वसूली करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया. आरोपित बनास नदी से बजरी भरकर गुजरने वाले प्रति ट्रक, डंपर, ट्रेलर को पास कराने के पेटे तीन से पांच हजार रूपये घूस लेता था. घूस की दरे कोई निर्धारित नहीं थी बल्कि जितनी रात-उतनी दर हो जाती थी.
आधी रात की कमाई 1 लाख 46 हजार 500 रुपये-
इस तरह की मिली सूचनाओं पर एसीबी टीम ने तैयारी करते हुए नानेर चौराहे पर बीती रात को दबिश दी तो कैलाश जाट कांस्टेबल अपने निजी वाहन कार से कथित बीस से अधिक दलालों के मार्फत ट्रक-डंपर ट्रेलर चालकों से रोजाना की तरह ही यह वसूली कर रहा था. जिसे एसीबी टीम ने दबोचते हुए तलाशी ली तो इसके कब्जे से एसीबी 1 लाख 46  हजार 500 रुपयेबरामद हुए तथा कार जब्त की. जिसने पूछताछ में यह रूपये बनास नदी से अवैध रूप से बजरी भरकर लाने वाले वाहनों को पास कराने कराने के पेटे वाहन चालकों से घूस में लेना बताया तथा कार अपने बड़े भाई की बताई. यह घूस राशि वह थाना प्रभारी पीपलू के मौखिक निर्देश पर रोजाना की तरह नानेर चौराहे पर एकत्र करने पहुंचा है और इसका हिसाब रोजना का रोजाना सुबह थाना प्रभारी को देता हूं. उसने यह बात भी पूछताछ में बताई कि वह प्रति माह 40 लाख रुपये से अधिक रुपये बजरी वाहन पास कराने के पेटे घूस के वसूल कर सीआई को दे रहा है. इस घूस की उच्च अधिकारियों से छोटे स्तर के कर्मी तक में थानाप्रभारी बंदरबाट करते हैं. इस पर एसीबी टीम ने कांस्टेबल कैलाश जाट से उसी समय पीपलू एसएचओ से बात कराई तो कांस्टेबल ने कहा कि साहेब आज अब तक बजरी वाहन पास कराने के पेटे 1 लाख 46  हजार 500 रुपये घूस के एकत्र हुए है बताया ओर कहा कि यह रुपए मैं देने आ जाऊं क्या साहब? एसएचओ ने कहा कि मैं क्वार्टर पर हूं जल्दी से देकर वापस चले जाना. इस पर एसीबी टीम कांस्टेबल कैलाश को लेकर रवाना हुई तो एसएचओ को किसी कथित दलाल ने फोन पर ही इस आशय की सूचना दे दी. जिसके चलते एसएचओ एसीबी टीम के पहुंचने से पहले ही थाने से फरार हो गया.
कांस्टेबल के पैतृक गांव में भी तलाशी-
इस पर एसीबी टीम फरार हुए एचएचओ को तलाश रही है. वहीं एसीबी टीम गिरफ्तार किए कांस्टेबल कैलाश जाट के पैतृक गांव में दबिश देने सहित इस धंधे में अन्य कर्मियों अधिकारियों की संलिप्तता हो सकती है के एंगल से जांच कार्रवाई कर रही है.
व्हाट्सएप से करते थे कॉलिंग-
थानाप्रभारी विजेंद्र गिल व कांस्टेबल कैलाश जाट एक-दूसरे से सीधे कॉल की बजाए व्हाटसएप के जरिए कॉल करते थे. थानाप्रभारी सीधे कॉल ट्रेस होने या रिकॉर्ड होने के चलते व्हाट्सएप कॉल का प्रयोग करते थे. इससे साफ नजर आता हैं कि थानाप्रभारी इस मामले में मंझे हुए खिलाड़ी थे. इतना ही नहीं थानाप्रभारी ने कांस्टेबल से यह तक कह रखा था कि व्हाट्सएप पर ही बात किया करें, ऐसे उच्चाधिकारियों से भी निर्देश मिले हुए हैं. कांस्टेबल कैलाश जाट व्हाट्सएप के जरिए रिश्वत के रूप में ली जा रही राशि का रात में करीब दो-तीन बार कॉल करके बताता था. इसके स्क्रीन शॉर्ट व रिकॉर्डिंग भी एसीबी ने लिए हैं.
दो सहयोगी दलाल भी थे नियुक्त, मिलता था 10 प्रतिशत-
थानाप्रभारी ने कांस्टेबल कैलाश जाट के सहयोग के लिए उसके ही गांव कड़ीला के रहने वाले दो व्यक्ति दलाल के रूप नियुक्त किए हुए थे. इनमें राकेश चौधरी, शंकरलाल चौधरी निवासी कड़ीला रात्रि के समय कांस्टेबल द्वारा की जा रही अवैध वसूली के कार्य रातभर साथ रहकर सहयोग करते थे. जिन्हें थानाधिकारी की ओर से बंदरबाट की जाने वाली राशि में से 10 प्रतिशत हिस्सा रोजाना दिया जाता था. दोनों सहयोगियों को भी एसीबी की टीम ने गिरफ्तार किया हैं.
आज राशि कैसे कम मिली?-
बीती रात्रि को एसीबी ने कार्रवाई के बाद कांस्टेबल से थानाधिकारी से फोन पर वार्तालाप करवाया तथा एकत्र की गई राशि की जानकारी दिलवाई. इस पर थानाधिकारी ने कांस्टेबल से कहा कि आज राशि कैसे कम मिली. कांस्टेबल ने कहा कि आज वाहन कम निकले हैं. इसके बाद कांस्टेबल ने कहा कि यह राशि अभी देने आऊं या कल सुबह तो एसएचओ ने कुछ देर सोचने के बाद उसे उसी वक्त क्र्वाटर पर आकर देने के लिए बुला लिया. एसीबी ने इसकी रिकॉर्डिंग की.
इनका कहना हैं–
बजरी खनन माफियाओं से वसुली की शिकायतें मिल रही थी. हमनें शिकायतों का सत्यापन करवाया तो सही पाया. आरोपी काफी तेज थे. इसके चलते हमने भी उसी हिसाब से जाल बिछाया. कांस्टेबल व सहयोगी तो गिरफ्त में हैं, एसएचओ को भनक लगने पर वह फरार हो गया हैं. जिसे टीमें ठिकानों पर दबिश देकर तलाश रही हैं. कार्रवाई में एसीबी जयपुर एडिशनल एसपी देशराज यादव का भी सहयोग लिया गया.
विजयसिंह, एडिशनल एसपी, एसीबी

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