सरकार की विनाशकारी नीतियों के कारण सरकारी कंपनियों की हालत नाजुक: कन्हैया

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बेगूसराय,21अप्रैल (उदयपुर किरण). पूरी दुनिया में जब पेट्रोल के दाम घट रहे थे तब भारत में इसके दाम लगातार बढ़ते जा रहे थे. मोदी जी ने केवल दो बड़े उद्योगपतियों के फायदे के लिए पूरे देश के उद्योगों की कमर तोड़ दी. यह बात भाकपा प्रत्याशी कन्हैया कुमार ने रविवार को बखरी विधानसभा के विभिन्न गांवों में जनसम्पर्क के दौरान कही.

कन्हैया ने कहा कि किसानों के मांगों की अनदेखी करके उन्हें बार-बार सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग करने पर मजबूर किया जा रहा है. तमिलनाडु के किसान दिल्ली में कभी मुंह में मरा चूहा रखकर तो कभी अपना मूत्र पीकर धरना दे रहे थे तो प्रधानमंत्री ने उनसे मिलना तक जरूरी नहीं समझा. उन किसानों को देशद्रोही कहा गया और यही वजह है कि आज बनारस में किसान प्रधानमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. प्रधानमंत्री के पास किसानों से मिलने का समय नहीं है, लेकिन वे बड़ी हस्तियों की शादी में शामिल होने के लिए समय निकाल ही लेते हैं.

उन्होंने कहा कि जिस दिन नोटबंदी हुई, उसके अगले दिन पूरे देश के अखबारों के पहले पन्ने पर पेटीएम के प्रचार में मोदी जी की तस्वीर नजर आई. यही नहीं, जियो को हर तरीके से बढ़ावा देने वाली सरकार ने सरकारी कंपनी बीएसएनल का इतना बुरा हाल कर दिया कि उसके पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं बचे. आज बीएसएनएल के 54 हजार कर्मचारियों की नौकरी खतरे में है. कन्हैया ने कहा कि मोदी सरकार ने अपनी विनाशकारी नीतियों को इसी तेज रफ्तार के साथ लागू करना जारी रखा तो आने वाले समय में कई सरकारी कंपनियों की ऐसी ही हालत हो जाएगी.

कन्हैया ने कहा कि भाजपा के जो उम्मीदवार बेगूसराय आना ही नहीं चाहते थे, वे बता दें कि नवादा की जनता के लिए कौन सा काम किया है जिसे वहां की जनता हमेशा याद रखेगी. देश विवाद पैदा करके मीडिया की नजर में आने से नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए उठाए गए ठोस कदमों से आगे बढ़ता है. भाजपा ने योजनाओं को भी खोखले नारों में बदल दिया है. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का आधे से ज्यादा बजट विज्ञापन पर खर्च कर दिया गया, लेकिन इस योजना के तहत एक भी स्कूल नहीं खोला गया. स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी जरूरतों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कन्हैया ने कहा कि बेगूसराय में बखरी के सरकारी अस्पताल में चार डॉक्टर भी नहीं हैं तो क्या सरकार को इससे होने वाली परेशानियों की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए. बेगूसराय ही नहीं बल्कि पूरे देश के अस्पतालों में लाखों डॉक्टरों की कमी है. जो हाल स्वास्थ्य के क्षेत्र का है, वही शिक्षा के क्षेत्र में दिखता है. बेगूसराय के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का काम लंबे समय से टलता आया है.

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